आहोम सेनापति लाचित
मुगल साम्राज्य की आंधियो में जब
सर्वदिक अंधकार छाया था
कुछ माटी के दीपों ने लड़कर
अंधकार मिटाया था...
ऐसा ही एक दीप पूर्वोत्तर की घंटियों में जला
जिसने अपने तप से पूर्वोत्तर का तम हरा
दीप सा होकर भी जिसका सामर्थ्य दिवाकर जैसा था
वो आहोम का बेटा लाचित-बिल्कुल ऐसा था.....
औरंगजेब की क्रूर आंखों ने,सपना देखा भारी
भारत को निगलने की थी पूरी तैयारी
राम नाम रखकर भी जो ,रावण के हाथों खेला
वो राजारामसिंह राजपूती शान पर लगा है दाग काला...
सन 1671 में सरायघाट के मैदानों में,मुगल भेड़िये आये थे,,
हाथीघोडे,तीरंदाज़,बंदूकची साथ लाये थे
सत्तर हजार की मुगल सेना से दो-दो हाथ किये आसामी वीरो ने
लाचित की तलवार का पानी फिर देखा मुगलिया हूरों ने...
कामरूप की धरती पर चण्डी का रूप छाया था
लाचित की तलवार ने जब,मुगलो पर कहर ढाया था
जान बचाकर मुगलिया सेना दूम दबाकर भागी
पाकर ऐसे बेटे को ब्रह्मपुत्र बनी बड़भागी...
भूपेन्द्र उबाना
अजयमेरु
राजस्थान
मुगल साम्राज्य की आंधियो में जब
सर्वदिक अंधकार छाया था
कुछ माटी के दीपों ने लड़कर
अंधकार मिटाया था...
ऐसा ही एक दीप पूर्वोत्तर की घंटियों में जला
जिसने अपने तप से पूर्वोत्तर का तम हरा
दीप सा होकर भी जिसका सामर्थ्य दिवाकर जैसा था
वो आहोम का बेटा लाचित-बिल्कुल ऐसा था.....
औरंगजेब की क्रूर आंखों ने,सपना देखा भारी
भारत को निगलने की थी पूरी तैयारी
राम नाम रखकर भी जो ,रावण के हाथों खेला
वो राजारामसिंह राजपूती शान पर लगा है दाग काला...
सन 1671 में सरायघाट के मैदानों में,मुगल भेड़िये आये थे,,
हाथीघोडे,तीरंदाज़,बंदूकची साथ लाये थे
सत्तर हजार की मुगल सेना से दो-दो हाथ किये आसामी वीरो ने
लाचित की तलवार का पानी फिर देखा मुगलिया हूरों ने...
कामरूप की धरती पर चण्डी का रूप छाया था
लाचित की तलवार ने जब,मुगलो पर कहर ढाया था
जान बचाकर मुगलिया सेना दूम दबाकर भागी
पाकर ऐसे बेटे को ब्रह्मपुत्र बनी बड़भागी...
भूपेन्द्र उबाना
अजयमेरु
राजस्थान
सुंदर कविता
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